Thursday, January 22, 2009

Plague

This is the first poem that I wrote in my life, way back on October 11, 1994. Though the title is in English, the poem is a Hindi poem.
Plague को हव्वा मत बनाईये,
न डरिये और न दूसरों को डरायिये।
दवाईयों का stock घर में मत बढाईये
ज़रुरतमंदों को मत तडपायिये।
चूहों को मार कर सड़क पर मत छोड़ जाईये,
उसपर flint छिड़ककर उसे जलाईये।
आसपास गन्दगी मत फैलाईये,
वातावरण को स्वच्छ बनाईये।
बस इन सावधानियों पर अमल फरमाईये,
अपने घर, वातावरण, शहर को सुखी पाईये।
Plague का भी इलाज है जनाब,
इसे लाइलाज मान कर मत घबराईये आप।

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