ओह मेरे सनम तुझे मेरी कसम,
मुझे देखने दे पल भर के लिए।
जुल्फों को हटा तू सामने से,
तेरा चेहरा नहीं परदे के लिए।
जुल्फें है या काली घटा,
चाँद छिपा है, इनको हटा।
अंधकार में डूबा है मेरा दिल,
तरसता है चांदनी के लिए।
जुल्फों को हटा तू सामने से,
तेरा चेहरा नहीं परदे के लिए।
माना तेरे लिए है मुश्किल,
पर बस में नहीं है मेरा दिल।
अब आ जाने दे इसे सामने तू,
यह चाँद नहीं ग्रहण के लिए।
जुल्फों को हटा तू सामने से,
तेरा चेहरा नहीं परदे के लिए।
PS: I wrote this poem, way back in 2001.
Saturday, July 17, 2010
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